कुछ कम में खुश है,
कुछ सब पा के भी खुश नहीं.
किसी के लिए दो रोटी ही बहुत है,
पर किसी को मीठा ज़रूरी.
ज़िन्दगी थमती नहीं है,
चाहाते आधी हो या पूरी.
लोग मिल जाते है अक्सर,
कुछ गलत, कुछ सही.
रास्ते खुद बन जाते है,
जब मंजिलें हो सही.
अँधेरे का भी मज़ा कुछ और होता है,
एक धीमी सी आहट, और गहरा सन्नाटा.और बिजली का कड़कना,
वो हवाओं का चलना.
थिमथिमाता हुआ सावन.
रिमझिम, रिमझिम.
इच्छाएं खत्म नहीं होती,
चाहे जितना भी मिल जाए.
और और की लोलुपता में,
फंसा हुआ है इंसान.
मांगो मिटटी,
तो मिलता है सोना.
और सोना मांगे,
तो होता रोना.
यह माया का जाल है,
यह अकडन की चाल.
डूबेगी यह ज़िन्दगी,
बिछा है मायाजाल.
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