तनहाई में गुम है ऐसे,
की आहट भी कमज़ोर है॥
वो आए ज़रूर मेरी चौखट पर.
पर चंद लम्हों के लिए॥
सदियाँ बीत गयी पर आज भी,
इस दिल में उनकी धड़कनो का शोर है॥
नज़र कमबख्त हटती ही नहीं उनसे.
दिल इबादत, उन्ही का जोर है॥
रौंगटे हो जाते है खड़े,
जब भी होते उनसे रूबरू हम॥
इस दिल के कदम आज भी,
बढ़ते उन्ही की ओर है॥
इश्क तो किया ही हमने,
और दगा भी खायी॥
सन्नाटे भरी गहरी रातें
गिन-गिन उनकी यादों में जलाईं॥
ऐसी चोट खायी ही हमने,
की रूह थरथराती है अब हमारी॥
दिल कांपता है इश्क करने से,
और लोग दिल-फेंक बुलाते है॥
जब मोहब्बत थी हमें उनसे,
हमने थी दुनिया भुलाई॥
आज भी उनकी याद में,
कितनी कड़वी लगे तनहाई॥
एक दौर था जब मुस्कुराते थे हम,
उन्ही के मुस्कुराने से॥
दर्द-ऐ-दिल हाल है मेरा,
आज उनके चले जाने से॥
काश ये दिल बयान कर पाता उस मोहब्बत को,
जो थी, और अब भी है॥
नज़रो में उनकी ज़ालिम है हम.
पर ज़ुल्म किया भी खुदपे है॥
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